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*मध्यप्रदेश की विमुक्त जातियाँ और उनकी संस्कृति*


औपनिवेशिक शासन व्यवस्था ने कई जाति-समुदायों के प्रति जिस कठोर आचरण का परिचय दिया उससे वे सभी जातियॉं पीढिय़ों तक के लिए विकास, गरिमा और सम्मान से वंचित होकर एक ऐसे नेपथ्य में चली गई थी जिसकी प्रतिपूर्ति के लिए अनेकानेक प्रयासों की आज आवश्यकता है। देश और प्रदेश में शासन ने इस दिशा में बहुत गंभीरता से पहल भी की है। मध्यप्रदेश में 21 विमुक्त जातियाँ निवासरत हैं। यथा- कंजर, सांसी, बंजारा, बांछड़ा, कालबेलिया, भारमोटिया (भरमोटिया), मोघिया, बागरी, नट, पारधी, बेडिय़ा, हबूदा, भाटू, कुचबंदिया, बिजारिया, कबूतारिया (कबूतर), सन्दुत्या, पासी (पासीया), चन्द्रबेडिय़ा, बेरागी और सनोरिया ।
अन्य जातियों की तुलना में उपर्युक्त जातियों की कला, साहित्य, भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर तुलनात्मक रुप से बहुत कम अध्ययन उपलब्ध हैं। यदि कुछ अध्ययन हैं भी तो वे बहुत एकांगी और इन जातियों की गरिमा को कम करने वाले तथा संवेदना और सत्य से लगभग रहित हैं। मध्यप्रदेश के लगभग हर जिले में इन जातियों का निवास और विस्तार है। हमने कल्पना की है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और स्कूल ही नहीं पुलिस, प्रशासन तथा न्यायिक और अभिभाषण व्यवस्था में संलग्न सुधी अध्ययेतागण अपने जनपद में निवासरत किसी एक विमुक्त जाति के सांस्कृतिक पक्षों और अन्य निर्धारित विचार बिन्दुओं पर अपना एक प्रामाणिक शोधालेख / पीपीटी / फिल्म प्रस्तुत करें ताकि इन समुदायों के सांस्कृतिक विश्व को प्रतिष्ठा प्राप्त करने में सहजता हो सके।